गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

आप अपने समय और सामर्थ्य का उपयोग किस प्रकार करते हैं?

यदि आप रोज़ शाम को टीवी पर ख़बरों में बढ़ते अपराध और बिगड़ते हालात को देखकर यह अफसोस करते रहते हैं कि दुनिया रसातल में जा रही है तो आप चिंता के वर्तुल में भ्रमण कर रहे हैं. इसके विपरीत यदि आप प्रभाव क्षेत्र में हैं तो आप ऐसे सकारात्मक प्रयास करते हैं जिनसे लोगों में जागरूकता आये. आप नए विचारों के साथ आगे आते हैं, लोगों को उनकी योग्यताओं और शक्तियों का अहसास कराते हैं, और उनका मार्गदर्शन करते हैं ताकि अधिकाधिक लोगों के जीवन में सुधार आये.
मैं कई लोगों के बीच में वार्ता करने से झिझकता था क्योंकि मेरे भीतर यह भय व्याप्त था कि मैं कुछ भी ठीक से नहीं कह पाऊंगा और सभी मुझे मूर्ख समझेंगे. मैं इतना संकोची था कि किसी गोष्ठी में कुछ पूछने के लिए या अपने विचार रखने के लिए हाथ उठाने से भी हिचकिचाता था. यदि मैं कुछ पूछता भी तो मेरा दिल बेतहाशा धड़कने लगता और मैं खुद से यह पूछता रहता कि मैं कोई बेवकूफी भरा सवाल तो नहीं पूछ रहा हूँ! मैं हमेशा चिंताओं के क्षेत्र में ही फंसा रहता था. किसी तरह मैं उसमें से निकलकर प्रभाव क्षेत्र में जा सका. ऐसा करने के लिए मुझे पब्लिक स्पीकिंग कोचिंग से बड़ी मदद मिली. अपने चिंता क्षेत्र से बाहर निकले बिना मैं लोगों के सामने बिना किसी तैयारी के भाषण देने के बारे में सोच भी नहीं सकता था.
अब मैं आपको यह बताता हूँ कि वे कौन सी बातें (चिंता का क्षेत्र) हैं जिनके बारे में लोग बड़ी चिंता करते हैं. उसके ठीक बाद मैं उन उपायों (प्रभाव क्षेत्र) को इंगित करूंगा जो खराब दशाओं में सुधार ला सकते हैं:
पर्यावरण/प्रदूषण - रिसाइकल करें. कम उपयोग करें. आवश्यकताएं घटाएं.
आय-व्यय/घरेलू खर्च - आमदनी बढ़ाएं. खर्चे कम करें. छोटी-छोटी बचत करें.
स्वास्थ्य - व्यायाम करें. पैदल चलें.
अकेलापन/अवसाद - अपने मेलजोल का दायरा बढ़ाएं. खुशमिजाज़ बनें.
भविष्य - टाइम मशीन बनाएं.
जब भी आप किसी मसले पर काम करें तो खुद से यह ज़रूर पूछें, "मैं इस स्थिति में किस प्रकार सुधार ला सकता हूँ? मैं इसे बेहतर कैसे बना सकता हूँ?"
कुछ नए विचार एकत्र करें और उनपर कार्रवाई शुरू कर दें. यदि आप कुछ नहीं सोच पा रहे हों तो यह अवश्य अनुभव करें कि किसी समस्या के बारे में चिंता करना केवल अपने समय और शक्तियों की बर्बादी है. फिर अपने संसाधनों को उस दिशा में मोड़ दें जहां आप वाकई कुछ करके दिखा सकते हों.


सोजन्य से: श्री रमेश सियाग वाया ईमेल: अचिवेर्स गूगल ग्रुप....

डॉ प्रवीण शर्मा / 09212943002

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बुधवार, 13 अप्रैल 2011

Dr. Praveen Sharma - Alipur Success Celebration

 

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शनिवार, 9 अप्रैल 2011

आओ एक जुट हो - जाएँ

आओ एक जुट हो - जाएँ
ना रुकेंगे, ना थकेंगे, न लेंगे चैन की सांस,
जब तक नहीं हो जाता  आर्थिक आजादी का आगाज.
अन्ना बैठे अनशन पर तो हिला दी सरकार,
आज एक जुट होकर जुड़ने की है सबको दरकार,
जन आन्दोलन बना दो RCM को बांटो जन - जन में ये प्यार.
ना जाए अब एक भी पाई (पैसा) बाहर दूर विदेशो में,
स्वदेशी का बिगुल बजा दो, जन का पैसा जन की ही जेबों में.
बहिष्कार करो
विदेशी चीजों का,
समझाओ उनको
जो पथ-मति भ्रष्ट हुए हैं,
अपने बहेन और भाई,
लुट रहे चकाचौंध में,
अब भी अकाल ना आई.
पहले अंग्रेजो ने, फिर
कुछ देश के गद्दारों ने,
अब नेता नीच हज़ारो ने,
इस देश की अस्मत लूटी है.
उतरे इनका भूत, कसम से,
RCM वो विभूति है.

----- डॉ प्रवीण शर्मा

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गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

आन्दोलन - जनक्रांति - जय आर.सी. एम्.

















इन तीनो में एक समानता रही है, स्वस्थ भारत, स्वच्छ भारत, इमानदार भारत, सोहार्द पूर्ण भारत, विश्वगुरु भारत, अहिंसा वादी भारत, भ्रस्ताचार से मुक्त भारत, स्वतंत्र भारत, स्वाभिमान भारत, अन्ना हजारे के अनशन को हम अपनी पूरी टीम की और से पूर्ण समर्थन करते हैं. इस आशय को लेकर कल जंतर मंतर की और शाम ८ बजे कूच करेंगे. 
अपना समर्थन आप अपना कमेन्ट दर्ज करके भेज सकते हैं. आओ भ्रस्ताचार को जड़ से उखाड़ फेंकने में एक दुसरे का सहयोग करें. 

डॉ. प्रवीण शर्मा,
09212943002, 09213241236
drpraveen.rcm@gmail.com

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रविवार, 3 अप्रैल 2011

हमारी भाषा - हमारे संस्कार

कुछ नासमझ लोग, श्री लंका के लिए बहुत ही अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं. वो ये भूल गए हैं की २८ साल तक जितने भी क्रिकेट वर्ल्ड कप हुए उनमे हम जीत नहीं पाए, तो हम भी उसी कतार में थे जिसमे, आज श्रीलंका खड़ा हुआ. वो हमारे देश में आकर हारा, मेरे प्यारे भाइयो मैं एक सन्देश अपने इस  आर सी एम् जीवन के माध्यम से देना चाहता हूँ. क्योंकि आर सी एम् की शिक्षा हमारे संस्कार भी पैदा करती है. 

हमारी भाषा - हमारे संस्कार
भाषा वो हो जो दुश्मन को भी भाये,
विश्व विजेता वो जो दुनिया का चहेता बन जाए..
विश्व कप जीता, इस पर हमें गुमान हैं,
फिर भी न भूलें - हम आर. सी. एम् के सेवक,
और भारत की संतान हैं. हम सबसे पहले इंसान हैं.
इसलिए कहते हैं सारे जग वाले भी अब,
हमारा देश भारत और हम इसके वासी,
दोनों ही महान हैं.
जय आर. सी. एम्. / जय भारत

डॉ. प्रवीण शर्मा
09212943002 - Delhi

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RCM Jeevan Hits

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